जोगी दर्शन दे, दर्शन दे, दर्शन दे ।।टेक।। दुखिया हूँ तेरे द्वारपे आया।
(तर्ज: माझा होशील का...)
जोगी दर्शन दे, दर्शन दे, दर्शन दे ।।टेक।।
दुखिया हूँ तेरे द्वारपे आया।
अर्पण करने तुझको काया।
मिल जाना,मत ठुकरा दे।। जोगी दर्शन0।।१।।
यादमें तेरी रहत दिवाना ।
बन बन घुमता हूँ मस्ताना ।
जान मेरी मत गमवा दे ।। जोगी दर्शन0।।२॥।
किसको है संसार पियार।
किसको है धन-मोह अपारा।
मुझमें फ॒कीरी जगवा दे ।। जोगी दर्शन0।।३॥।
तुकड्यादास कहे दर्शन से ।
छूट जाऊँगा माया डरसे ।
तेरी नजर अब बरसन दे।। जोगी दर्शन0।।४।।