ये दुनियाँ प्रभू का स्थान है ।
(तर्ज : ये हरियाली और ये रासता.... )
ये दुनियाँ प्रभू का स्थान है ।
इस दुनियाँ में हलन-चलन जो -
प्रभू का वहीं गुण-गान है ! ।।टेक।।
पर्वत - वृक्ष है बेला उनकी ।
सागर-नदियाँ शोभा उनकी ।
चाँद-सुरज है अँखियाँ उनकी ।
सन्त उनके जीवन के प्रिय प्राण हैं ।।1।।
एक तरफ है असूर की शोभा ।
एक तरफ है देव औ रंभा ।
बीच गडा प्रकृति का खंबा ।
खेल चले,मेल चले, यही तो शान है ।।2।।
आते हजार हैं, जाते हजार है ।
रोते हजार है, गाते हजार हैं ।
तुकड्या कहे,नहीं उनका ये पार है ।
जो जाने,वही शाने,यही तो जान है ! ।।3।।