मेहमान समझकर आया ।
(तर्ज : तुम छलिया बनके आना...)
मेहमान समझकर आया ।
तूने क्योंकर दिल भरमाया ?
तेरी बीती उमर आगे तू सुधर ! ।।टेक।।
कहता था दुनिया जाऊँ।
तब तो प्रभू-पद को पाऊँ।।
यह उध्दरने को काया।
मुझे नहीं लपटेगी माया ।। तेरी बीती ।।1।।
सेवा ही करूँगा सत् की।
सब रूप समझ भगवत् की ।।
सिर रखूँ स्वामी की छाया ।
सत्-ग्यान साथ जब लाया।। तेरी बीती ।।2।।
सब भूला दुनियाँ देखा।
अब घुमता झूठ सरीखा।।
कुछ समझ तुझे नहीं आया।
कहे तुकड्या याद दिलाया। | तेरी बीती ।।3।।