मेरे सबकुछ सद्गुरु - राज है ।
(तर्ज: छोडो -छोडो मोरे सैय्या साँवरे! ... )
मेरे सबकुछ सत्गुरु-राज हैं ।।टेक।।
उनके बिन मोहे चैन न पावे ।
चैन न पावे, दिल घबडावे ।।
वही मेरे मन के साज हैं ! ।।1।।
उनकी पूजा है, मेरी शांती |
है मेरी शांति, निकली भ्रांति ।
उनकी कृपा सिरताज है ! ।।2।।
सत् गुरु वाणी गंगा जल है ।
दिल धोये जाये मल-मल है।।
गुरु है बल, हम बाज है ! ।।3।।
तन-मन-धन सब कुछ गुरुके हैं।
तुकड्या कहे, अनुभव उरके दे ।।
वही करे, पूरण काज है ! ।।4।।