मेरा गाना है गाने को ।

(तर्ज: तूंचि कर्ता आणि करविता... )

मेरा  गाना  है   गाने       को ।
ना   मंजिल   जानेको ! भाई  ! ।।टेक।।
कभी तो तालों में मस्त हूँ मै ।
कभी तो स्वर में लगा  रहूँ मैं ।।
कभी तो देखूँ इधर-उधर मैं।
जनता के दिल बहलाने को ! ।।1।।
करें मजूरी मजूर - जैसे।
अपने गमको खोकर वैसे।।
इसका अर्थ हे निकले पैसे।
दिन काटे जीते   रहने   को ! ।।2।।
इससे बचकर जो कोई जावे ।
वहीं परमपद निर्भय पावे।।
तुकड्यादास कहे, मन भावे।
समय नहीं मुझको डरने को!।।3।।