बोल दो ऐ बन्धुओ ! गांधी महात्मा कौन था ?
(तर्ज: आशा तूज भोवती....)
बोल दो ऐ बन्धुओ ! गांधी महात्मा कौन था ?
सत्तालोलुप था कि वह निरपेक्ष था, या मौन था ? ।।टेक।।
जात नहि मानी थी उसने, भारतीय हम है कहा ।
क्या गलत था सूत्र यह? बस उन्नती का झोन था ।।१।।
मस्त्रि-महामन्त्री भि सब हो जाय समरस लोग में ।
खर्च हो कमती सभी, यह गलत कहना तो न था ।।२।।
हों ख़ुले मन्दिर सभी, जो चाहते उनके छिए ।
धर्मशिक्षामय हो मन्दिर, जैसे ऋषिका भवन था ।।३।।
अपने कामों में इमानी सत्यता स्थापित करो ।
श्रेष्ठ भक्ती है यही, सद्ग्रंथ-मत क्या यौं न था ? ।।४।।
शुध्दता, पावित्र्यता, मनमें औ बाहर चाहिए ।
गांधी का कहना यही, हमने सुना प्रत्यक्षता ।।५।।
हरघडी सेवा करो आजाद अपने देशकी ।
दास तुकड्या यों कहे, कोई बोल दे यह गौन था ।।६।।