प्रीत टुटे न कहीं, दिलवर की, सुखकरकी ।

(तर्ज: आये तो जाय कहाँ...)

प्रीत टुटे न कहीं, दिलवर की, सुखकरकी ।
जनम निभा, यह जाय हमारा ।। टेक ।।
दीपकपर ज्यो मस्त पतंगा,कमलिनिपर ज्यो आशक भृंगा ।।
जैसे पतिबिनु सति न रही ।।१।।
मयुर नचे, बादल घन छाये, चंद्र चकोर निरख सुख पाये ।।
तुम देखे सुख शान्ति वहीं ।।२।।
बिनु पानी नदियाँ सब सूनी, बिन बालक कुटिया अँधरीनी ||
कहे तुकड्या बिन प्रभु बिरही ।। ३।।