बस ! चलो खेलने जायेंगे
(राग : देश; तर्ज: मजसबे बोल रे माधवा... !)
बस ! चलो खेलने जायेंगे ।
वही सारा दिन बितवायेंगे ! ।।टेक।।
यहि नारा रहता लड़कोंका ।
क्या जाने वह कालका धडका ? ?
कब आये जम उठवायेंगे ! ।।1।।
आयि जवानी फिर तो क्या है ।
बिन जोरूके कहाँकी माँ है ? ?
पल नहीं घरसे भग पायेंगे ! ।।2।।
बूढापन जब आजाता है ।
तब जानो सब मर फजिता है ।।
कोई बुलाये नहिं आयेंगे ! ।।3।।
ऐसा समय गया अब बीता।
सुमरी नहीं पल भी गुरु-गीता ।।
तुकड्या कहे,कब प्रभू गायेंगे ? ।।4।।