पावन तव चरण स्मरण
(राग : सारंग; ताल: एकताल... )
पावन तव चरण स्मरण ।
ध्यान धरत बिघ्न-हरण ।।टेक।।
सबका है अनुभव ये, संत पंथ मत गाये।
सुनकर मन है, कहत जात नमन ।।1।।
शीतल मन शान्त विषय, निर्भयपद अविचल ये।
जन्म-मरण दुःख-रहित,पद पावे सज्जन- जन ।।2।।
यह सबकी सोच -समझ, ध्याये तब चरण सहज ।
तुकड्या कहे, तन्मय हो,स्वाँस-स्वाँस गाये मन ।।3।।