मिलनेको सादा दिल चाहता है
(तर्ज: आँखों में तुम्हारे जलवे है. . . )
मिलनेको सदा दिल चाहता है,क्यों बीच पडे यह रोडे है ?
अखियाँ तडपे बेचैन जिहा, आखोंके नीर न तोडे है ! ।।टेक।।
साराहि बदन झनकार कं, बजता है तार उमंग भरा।
कब मिल पाऊँ पियसे अपने? आशाके बढ़ते घोडे है।।1।।
ऐ बनकि चिडियाँ देख-इधर, मेरी खबर दे माशुकसे।
मैं आशक हूँ तेरे दर्शनका, किस पापिने तोड मरोडे है ! ।।2।।
देता हूँ वतन, तन और ये मन, जो चाहे उसे कुर्बान करूँ।
तुकड्याकी आस यही दिलमें ,यह भेद के फूटे फोडे है ! ।।3।।