यह खादी बेकाम, आजकी

         (तर्ज: तू माझा यजमान रामा ! ..... )
यह खादी बेकाम, आजकी यह खादी बेकाम ।।टेक।।
खादी पहनों चुनो चोर को, खींचो काले  दाम ।।१।। 
खादी पहनो शराब पीकर, करो देश बदनाम ।।२।।
खादी पहनों गुटबंदी कर, लूटो  देश   तमाम ।।३।।
वह खादी चाहते थे गांधी,जिसमें भरा हो राम।।४।।
खद्दर थी गरिबों की रोटी, नहि था ऐश - हराम ।।५।।
खद्दर थी समता की आँधी,श्रम-गोरव,सुख-धाम।।६।।
खद्दर थी संयम की ज्योति, स्वयंपूर्ण   हो   ग्राम ।।७।।
हो सहकार,भलाई सब की,यह था मन्त्र कलाम!।।८।।
तुकड्यादास कहे   नेताओ, छोडी   झूठे  कामा ।।९।।