बन्सीके सुनानेवाले ! बाँसरी सुना दे ।
तर्ज: बिगडी बनानेवाले...)
बन्सीके सुनानेवाले ! बाँसरी सुना दे ।
जीवन की यादको फिर से जगा दे ॥टेक।।
एक बार इस बन्सीने गोपिया जगाई ।
जिंदगी भुलाकर उनकी ध्यानमें लगाई ।
आजभी जगा दे मोहे,ध्यानमें लगा दे।
जीवन की यादको,फिरसे0 ।।१।।
एकबार गोपालोंने बाँसरी सुनी थी ।
तुम्हारे लियेही मोहन! उनकी जीवनी थी ।
तुकड्या कहे ऐ गिरिधर ! मुझको बना दे ।
जीवन की यादको,फिरसे0 ।।२।।