बडी फजीती है भारत की
(तर्ज: भजले सदगुरु नाम... )
बडी फजीती है भारत की, जब से गांधी मुक्त हुआ ।
घुसखोरों को दिन निकला, और व्यसनी सब-संयुक्त हुआ ।।टेक।।
हे भगवान ! जमाना कैसा, आवेगा आगे जनमें ?
हम तो देख -देखकर रोते,मर जाये लगता मनमे ।।१।।
सत्य - अहिंसा पत्थर बनकर,पोधीमें है छिपी पड़ी ।
जो सिरजोर-मुजोर कहावें, उनकी ध्वजा होगयी खड़ी ! ।।२।।
मना रहे हम गांधी - शताब्दी, ऐसे अजब जमानेमें ।
कर न सकें गर सुधार कुछ तो,क्या फल गांधी गाने में ? ।।३।।
सच्चे सेवक धूल खा रहे, उनको दिवाने कहते हैं ।
तुकड्यादास कहे ये दिन भी,देखें कबतक रहते है ?।।४।।