प्रीय भाई - बहनो ! आओ, देखने चालो

     ( तर्ज : समझमें न आवे माया... )
प्रीय  भाई - बहनों ! आओ, देखने  चलें ।
पूज्य गांधीजी की बातें क्यों न बाच लें ? ।।टेक।।
सत्य-अहिंसा की मूर्ति । 
त्याग-तपस्या की पुर्ति ।
ग्रंथरूप उनकी कीर्ति, शान्ति  में  फले ।।१।।
अमोलीक जीवन अपना ।
बना दिया जिन ने सपना ।
फिरंगी से लड़ते लड़ते,ज्योति में मिले ।।२।।
देशधर्म की हो भक्ति ।
हीन दीन पावे शक्ति ।
गुलामी से हो जग-मुक्ति, भाग ही खुले ।।३।।
सत्य-आग्रही था बापू ।
राम से सही था बापू ।
कहे,दास तुकड्या सबसे रह मिले-जुले।।४।।