बापू ! तेरी जन्म - शताब्दी

   (तर्ज : भजले सद्गुरु नाम निरंतर..(
बापू ! तेरी जन्म -शताब्दी
प्रेरक हो इस भारत को ।
नाना धर्म - पंथ हों चाहें, प्रेम मिले सबके मत को ।।टेक ।।
मानवको ऊँची चोटीपर चढने का स्वातंत्रय मिले ।
सत्य-अहिंसा मंत्र मिले,अविरोध जीवन का तंत्र मिले ।।१।।
साधनशुध्दि और सत्याग्रह, स्वदेश -प्रीती फुले-फले ।
श्रमनिष्ठा, समुदाय -प्रार्थना,व्यसनमुक्ति की गुँज चले ।।२।।
एक सुखी और एक दुखी, यह दोष देशका दूर भगे ।
क्यों मानव में ऊँच-नीचता ? समता-सद्गुण सदा जगे ।।३।।
सुसंस्कार आबालवृध्द में, भ्रष्टाचार न कहीं रहे ।
माता हो आदर्श, सुरक्षित गौएँ, सुखका स्रोत बहे ।।४ ।।
धीरवीर निर्भय हों सारे, एकात्मकता सदा खिले । 
आत्मोन्नतिका,राष्ट्रशक्तिका,विश्वशान्तिका मार्ग खुछे ।।५।।
घर-घर जाकर सजन, जनता जागृत करने बात करे । 
सब संसार स्वर्ग हो, सबको सबही मिलकर साथ करे ।।६।।
तुकडयादास कहे गांधीजी सदा यही निजध्यास करे ।
रामनाम का मंत्र रटे और कुटियामे ही  बास  करे ।।७।।