मेरे नैनमें आँधी आयी
(तर्ज: मेरा दिल यह पुकारे आजा... )
मेरे नैनमें आँधी आयी । मेरे दिलको दिया भुलाई ।
किसने तारी चढाया ! अपनी डालके माया ।।टेक ।।
मैं ध्यान लगाता था, मेरे श्याम सलोनेसे ।
मैं फूल चढाता था, मेरे मन के मनहीसे ।।
आज करने न पाया ।
आया प्रकाश यह आया ।।
किसने मिठी धून बजाया ?।। किसने तारी 0।।१।।
यह मधुर बजी वीणा, तारोंके ये झनकारे ।
यह खुशबू फेली है, मन मोह लियो मेरे ।।
कोई झाँज बजावे ।
कोई मिठासा गावे ।।
कोई नाच नचाने आया ।। किसने तारी 0।।२।।
यह नशा भयी भारी, मेरी रगरगमें छायी ।
आँखे खोलके देखा, वह प्यारा यदुराई ।।
खुशी दिलमें न समावे ।
पागल बनबन के गावे ।।
कहता तुकड्या रंग रंगाया ।।किसने तारी 0।।३।।