मीठी मीठी बाँसुरिया बजाई
(तर्ज: ऊँची ऊँची इनका क)
मीठी मीठी बाँसुरिया बजाई, बनमें श्याम ने जी, श्याम ने ।
यह दिल भूला है कुंज॒ गली के सामने जी,सामने ।।टेक।।
मोर मुकुट, राधिका निकट, ये दोनों देखे झूले में ।
दोनों थे पीताम्बरधारी,लुभावने, सुहावने ।।यह0।।१।।
सुन्दर बन है,निर्मल मन है,पीछे जमुनाजी के झरन है।
गोपालो में गैया खेले, झूम रही आराम में ।।यह0।।२।।
जब भूला खलक,तब पायी झलक,नहीं लगी पलक भी देर वहाँ ।
कहे दास तुकड्या मेरे, सदा वेही ध्यानमें ।। यह0।।३।।