ना दुनियादारी मे फँसता है मन

(तर्ज: मुरलीवाले मुरली बजा... )
ना दुनियादारी में फँसता है मन ।
वह   बन्सीवालेसे   लागी   लगन ।।टेक।।
रह रहके दिलमें वह बन्सीकी तारी ।
टूटेंना दिलमनसे लगती पियारी ।
आँखों में छाया हे प्यारा बिहारी ।।
हर स्वासमें मेरा चलता भजन,
मेरे भजन  में   वह   नाचे    सजन ।।१।।
क्यों पूछते हो कि क्या  है  खबर ? ।
है मेरी   किश्तीका   केवट   जबर ।
ना मुझको है जीने - मरने का डर ।।
कहे दास तुकड्या, हूं इसमें मगन ,
वह   बन्सीवालेसे   लागी   लगन ।।२।।