यह नयन - मनोहर ध्यान तेरा

            (तर्ज: यह प्रेम बदा भरपूर रहे... )
यह नयन -मनोहर ध्यान तेरा, मैं पागल हूँ वहि देखनको ।
अँखियनसे जुदा नहिं हो पलभी, ऐसाही लगे मेरे तनमन को ।।टेक।।
अँखियन में तेरी है जादु भरा, जिनपे हो निगा लौटेही नहीं ।
जैसे दीपक पर कुर्बान पतंग, वेसे आशक भक्त चढे रंगको ।।१।।
तेरी श्याम घटासी प्रीय छटा, मिलता है टुटा दिल दर्शनसे ।
चाहे हो फटा घरका अपने, तुकड्या कहे शांति मिले उसको ।।२।।