मस्त बनो अपने हरि - रँगमें

           (तर्ज: रागे कशाला भरलिस राधे. . )
मस्त बनो अपने हरि-रँगमें, चलो वही रंग चलो ।।टेक।।
यह दुनिया एक अजब तमाशा । दुर्बल मनको डारत फासा ।
जरा उसे नहिं भुलो, उसे नहि भुलो, उसे नहिं भुला ।।१।।
दिल न किसीका व्यर्थ दुखाओ | सबको नीति मार्ग बतलाओ ।
सदा खुशीमें फुलो, खुशीमें फुलो, खुशीमें फुलो ।।२१।।
नहि आतम यह परमातम है । जरा उसीसे यह नहिं कम है ।
यह निश्चय ठानलो, निश्चय ठानलो, निश्चय ठानलो ।।३।।
तुकड्यादास कहे, संतोने । बोध दिया पर दिल नहिं माने । 
फिर -फिर वहि समझलो, वही समझलो, वही समझलो ।।४।।