बिसर गये श्याम गोपालनको
बिसर गये श्याम गोपालनको ।।टेक।।
जब -जब गौएं जाति चरायी । तब तो हमसे प्रीत लगायी ।
क्यों भूले हमको ? ।। बिसर 0।।१।।
जमुना-तिरपर रास रचन में । हम तो थे खेलनको बनमें ।
क्यों भूले हमको ? ।। बिसर 0।।२।।
प्रभु जब गिरिवर हाथ उठाये । तब हमहीसे काम कराये ।
क्यों भूले हमको ? ।। बिसर0।।३।।
तुकड्यादास कहे ब्रजवासी | धन्य थे भाग मिले अविनाशी ।
क्यों भूले हमको ? ।। बिसर0।।४।।