भारत के प्राण प्यारे
(तर्ज: आशिक हे तेरे नुरपर.. )
भारत के प्राण प्यारे, कहाँ बन्सि बजाते होंगे ? ।
वह मीठि-मीठि तान, अभी किसको सुनाते होंगे ? ।। टेक।।
याद नहीं आती होगी, क्या हमारी आज उन्हें ? ।
भारत की छोड गौएँ,अभी किसको चराते होंगे ? ।।१।।
साथ थे गोपाल हमी, जब कि चुराते थे मक्खन ।
अब वो कहाँ बैठकर, किस चीजको खाते होंगे ? ।।२।।
वीर बना रण के अन्दर, जाग उठाया था अर्जुन ।
अब वो अपने मुखकी गीता,किसको सुनाते होंगे ?।३।।
तोड दियां प्रण प्रभू का, भक्त भीष्मने रणमें ।
अब वो वैसे भक्तको फिर,किस जगह पाते होंगे ?।।४।।
लाज बचायी थी भरी सभामें उस द्रौपदी की ।
अब वो किसे सोचकरके, चीर दिलाते होंगे ? ।।५।।
थे वो जब कि हिंदमें, भारत था चमन गुलशन-सा ।
अब हुआ है फाक, क्या वह खबर ना पाते होंगे ? ।।६।।
हो कहाँभी श्याम, याद तो दिलाओ यार ! कोई ।
कहतो दो, तुकड्याकी मिसल,भूल ना जाते होंगे ?।।७।।