प्रभू ! मोहे तेरा रंग लगा दे
प्रभू ! मोहे तेरा रंग लगा दे ।
कबहूँ न फीको पडे अन्ततक, ऐसों कुछ करवा दे ।।टेक।।
दुनिया के दिनरात झकोरे, सहे न और दिला दे ।
तेरा नाम परम अमृत है, घूँटहिघूँट पिला दे ।।१।।
देखा सब परिवार और घरदार न अब दिखला दे ।
द्रोहि कुटिल स्वारथि सब देखे, कोउ न सीधे ।।२।।
जहाँ धरे पग वहाँ विषय है,विषसम ये बदला दे ।
ऐसी मस्ती चढ़ा दे मुझमें, तनकी खबर भूला दें ।।३।।
जरा नही है झूठ प्रभू ! यह, मेरा प्राण बचा दे ।
तुकड्यादास कहे मैं - मेरी अब तुझमें सकुचा दे ।।४।।