मोहन ! मोहन ! किस जगह है प्यारे मोहन !

          (तर्ज: प्रेमकी प्यासी, बनो. . . )
मोहन ! मोहन ! किस जगह है प्यारे मोहन !
मुझको पता न पाया ।।
तरस रहे है नैन हमारे, किसने नहिं बतलाया ।।टेक।।
मै  भूल गया, दिवाना भया ।
तुमहों   चन्दा, मैं   चकोरा ।।
दे दो दर्शन, कर उजारा, तरस - तरस भरमाया । मोहन ! 0।।१।।
दिख जाना जरा, पास आना जरा ।
मै पतंगा, तुम    हो   दीपक ।। 
कहता तुकड्या पास ले मुझको, तोड जगत्‌की माया । मोहन ।। 0।।२।।