बनों बनोजी मोहन ! तुम बनो
(तर्ज: बोलो - बोलोरे प्रभुजी. .. )
बनों बनोजी मोहन ! तुम बनो ।
अलग रहों नहिं अब हमसे तुम, अपने प्रियके तुम बनो ।।टेक।।
तुमबिन दिल दुखिया है हमरा । बरस समान जात पल पहरा ।
काहे बेर लगावत बहुरा? हमरे दिलके तुम बनो ।।१।।
क्या कहते निर्गुण की बाता । हमरि समझ कुछ भी नहिं आता ।
तुकड्यादास कहे नहिं भाता, इतनी अरज तुम सुनो ।।२।।