मोहनकी बन्सी है सुंदर

         (तर्ज: रागे कशाला भरलिस राधे... ) 
मोहनकी बन्सी है सुंदर, दिलको पियारी लगी ।।टेक।।
सुधबुध भूल गयी सब मोरी। लाग गयी बन्सीकी तारी।
सोहि भावना जगी, भावना जगी, भावना जगी, ।।१।।
रुप मनोहर,अति सुंदर है। मोरमुकुट कटि पीतांबर है।
देख नींद मोरि भगी, नींद मोरि भगी, नींद मोरि भगी ।।२।।
चलियेना चलियेना जमुना । देखेंगे प्यारा वह अपना ।
गैर भावना भगी, भावना   भगी, भावना   भगी, ।।३।।
तुकड्यादास कहे जगमाँही। ऐसी सुंदर वस्तु न कोई । देख सुरत मोरि रँगी, सुरत मोरि रँगी, सुरत मोरि रँगी ।।४।।