बनमें किसने बन्सि बजाया ?

             (तर्ज: जि देखू उत्त श्याम... )
         बनमें किसने बन्सि बजाया ? ।।टेक।।
वृक्षलता सब डोल रही है, चिडियाँ रंग रंगाया । 
गौएँ ऊँचे कान उठाती, किसकी  लागी  माया ? ।।१।।
सब गोपाल लाल हो बैठे, जैसे ध्यान  चढाया ।
कछुहूँ न बोल रहे बोलतसू, अपना नाच नचाया।।२।।
कई गोपिहूँने सुधबुध छोडी, अँखियन नीर बहाया । 
क्षितिपर दधिके माठ पटककर,प्रेम समाधी लगाया ।।३।।
उमड़ रहे बादल घनघोरे, किसपर छत्र धराया ।
ऊँचे -ऊँचे  पंख   उठाये, मयुरन   मन   हरषाया ।।४।।
तुकड्यादास कहे सब आनंद,किसिहुँ न जात समाया।
वह दिन कब देखन को आवे, श्याम सलोना पाया ?।। ५।।