मेरे भारत के भगवान !
(तर्ज: तुम्हारे पूजनको भगवान... )
मेरे भारत के भगवान ! तुमको पूजू कौन तरीके ? ।।टेक।।
तुम तो बिछूड गये आपस में ।
किसके जरा रहे नहिं बसमें ।
कैसे करु तुम्हारा ध्यान ? ।। तुमको 0।।४।।
किसमें जातका गर्व बडा है ।
किसमें धन-अभिमान खडा है ।
कहाँपर हो तुम दीन किसान ।। तुमको 0।।२।।
किसने ली है धर्म की माला ।
कहते हममें - भेद निराला ।
दिखती बिगड़ी सारी शान ।। तुमको 0।।३।।
हमने देखी तुम्हरी लीला ।
आया तुम्हरे मनमें काला ।
तुममें खेल रहा शैतान ।। तुमको 0।।४।।
पहले एक जानते सारे ।
अब क्यों होगये न्यारे-न्यारे ?
तब थी तुममें शक्ति महान ।। तुमको 0।।५।।
तुकड्यादास कहे,रंग लाओ ।
तुम सत्जुग का प्रेम उठाओ ।
नहिं तो हम होते हैरान ॥ तुमको 0।।६।।