मुझे अपना काम करना है

            (तर्ज : विश्वासपे क्यों बैठा है? ...)
मुझे अपना काम करना है, कुएँसे   जल   भरना  है ।
है किस जातीका कुआँ इस बातको क्या स्मरना है ? ।।टेक।।
किस जातीने पानी पिलाया, इसकी भी तो जरूरत क्या ?
नर था या के नारी थी, वह हो-तो उसकी हर्कत क्या ?
यह फजुल ही कहना है, कोई भी बस्ती हो चाहे -
है कौन झाडके नीचे, यह कहना बचपन  का  है ।।१।।
यही बोला था बुध्द - देवने, जब वह पानी  माँगा ।
आज तो हम समझ चुके हैं, जाती का भूत भागा ।
हम मानव यह कहना है,समझ-समझ कर रहना है ।
नहीं ऊँच-नीच यहाँ कोओ, ऐसाही अनुसरना है ।।२।।
गय्या-भैंसा क्या खाती है? यह नहिं कोई पूंछे ।
हमको तो अच्छा दूध होना, लेने   वाले  सोचें ।
यह किसकी भैसा है, यह कहना नाहकका है ।
है शुध्द दुधकी जरूरत, यह प्रेमसे अनुसरना है ।।३।।
तुम हो किन पंथोके, साधू ? कोन गुरुके  चेले ? ।
देव-देवता कौन तुम्हारी ? नारी है  कि   अकेले? ।
यह नाहक क्या पूंछना है ? पूंछो तो ग्यान कितना है ? ।
तुकड्या कहे,अनुभव बोलो,वही लेके उध्दरना है।४।।