मोरी लाज आज साँवरियों

    (तर्ज : मोहे पनघटपे नन्दलाल.. .)
मोरी लाज आज साँवरियों राख लिजो रे ।
मोहे भक्ति-प्रेम दान औ , ईमान दिजो  रे ! ।।टेक।।
भूला हूँ माया में, मानव की काया में ।
विषयों की छाया में ।।
अब न चाहूँ  बहिरन  के   सँग  रिझो  रे ! ।।१।।
तंग भयो आफत से, काम-क्रोध के मदसे ।
हार गयो हिम्मत से ।।
आज समझ -बूझ कहीं निभाव किजो रे ! ।।२।।
चरणन में भक्ति होय,अँखिया तुम प्रेम रोय ।
और नहीं चाहू कोय ।
सुमरन हर स्वाँस चले, दास   किजो  रे ! ।।३।।
तुकड्याने ठान लिया,निश्चय जिव -दान दिया ।
अब न हटूँ प्राण गया ।।
कृष्णचन्द्र    मुरलीधर    उर    बजो    रे ! ।।४।।