भगतके सँग ही भगवान्
(तर्ज : प्यारे अपनी गठडी खोल... )
भगतोंके सँग ही भगवान्,रहते खोकर सब अभिमान ।।टेक।।
जब-जब भक्त भजनमें गावे, तब-तब हरि-कीर्तन में आवे ।
सारा रँग खुले घमसान ।। रहते खोकर सब अभिमान0 ।।१।।
होती जहाँ भक्तकी बाणी,वहाँपर हरी करते सेवकानी।
शान्ति रहे वहाँ ही महान् ।। रहते खोकर सब अभिमान0।।२।।
जब संकल्प उठे भगतोंका, पूरा करना काम हरीका ।
यही जुग-जुगसे चला बिधान ।। रहते खोकर सब अभिमान0।।३।।
जिसके भक्ति -भजन नहीं अन्दर, उसमें हरि नहीं रहते मंदर ।
तुकड्या कहे, हरिकी यही शान ।। रहते खोकर सब अभिमान0।।४।।