मुझसे कहने लगी
(तर्ज: जाने कहाँ गयी... )
मुझसे कहने लगी-
मैं कभी की जगी हो जगी ! ।।टेक।।
मैंने पूछा उसे ढूँढती है किसे ।
मैं कुँवारी अभी, चाहती जिन्दगी ! ।।१।।
जो मुझे चाहते, मर्द वो है वहीं ।
मैं जिसे चाहती, पास आते नहीं ! ।।२।।
मेरा जीवन जला, रासता ना मिला ।
कैसे होगा भला ? फिक्र ये है लगी ! ।।३।।
मैने सल्ला दिया, मान प्रभुको पिया ।
दास तुकड्या कहे,वो तो सुनते भगी ! ।।४।।