मोहे गुरु - चारणका ध्यास रहे !
(तर्ज: छम्-छम् बाजे पायलियाँ मोरी. . )
मोहे गुरु - चरणका ध्यास रहे !
झूठ व्यापोंसे मन ये उदास रहे ! ।।टेक।।
कोई आओ सुजन,करने पूरा वचन ।
मेरा है जिसमें मन,उसमें करदो मगन ।।
छूट जाये ये जान,कोई आवे तूफान ।
गुरुकि भक्ति का मनमें,उल्हास रहे।। मोहे0।।१।।
कोई आसा नहीं, अब रही पास में ।
एकही है उमंग,सदा रहें दास में ।।
मुझको छायी नसा,दिल गुरुसे हँसा ।
चाहे रोना हो तो, वही आस रहे ।। मोहे0।।२।।
दिलसे गुरुका हो ध्यान,मुखमें गुरुका हो गान ।
उसमें रंग जाये प्राण, कोई भावे न शान ।।
फिरके आशा नहीं, ये जगत में कोई ।
कहता तुकड्या,फकिरी लिबास रहे ।।मोहे0।।३।।