देशको ऊँच उठना हैं,तो शिक्षण की प्रथा बदलो ।
(तर्ज :- मनाला स्थीर करवाया...)
देशको ऊँच उठना हैं,तो शिक्षण की प्रथा बदलो ।
सभी को काम करने दो, ये तरुणोंकी व्यथा बदलो॥टेक ।।
माध्यमिक से नहीं होगा, कहीं भी ग्यान कमरे में ।
निरीक्षण कर सभी का दिल, उसे प्रगति के पथ बदलो।।१।।
चले जाने दो खेतिमें, गुरुजी और सेवक भी।
वहीं होंगी. परिक्षाएँ, वृक्षकी छावोंमें बदलो ।।२॥
मशिनी काम इंजिनका, कराते ही सिखाना है।
परिक्षा भी वहीं होगी, बनाते बात सब बदलों ।।३।।
बने डॉक्टर बिमारोमें करें. सेवासे हों प्रारंभ |
बड़ा हों आफिसर भी वह, रहन उसकी भी तो बदलों ।। ४ ।।
किसानों के घरों में ही, बाँट दे वैसे युवकों को ।
घरोंमें भी वहीं धंधा, करे यह ख्याल तो बदलों ।।५।।
लगों पीछे सभी भाई, न लड़का आतसी होवे ।
वो तुकड्यादास कहता है, चरित् - हिनता सभी बदलो ।।६ ।।