बंदे ! हुशार होना बे, नहीं तो जा फिर रोना बे
भजन २६
(तर्ज : जमका अजब तडाका बे...)
बंदे ! हुशार होना बे, नहीं तो जा फिर रोना बे
।।टेक।।
इस दुनियामें कौन रहा है, सबको जाना बे।
पीर पेगंबर गये उसीमें, अब मत सोना बे
।।१।।
बड़े जटाऊ और थटाऊ महन्त नाना बे।
इस कुलोक के दरगे अंदर, सबको भोना बे
।।२।।
नाम गुरूका लेकर प्यारे, मैला धोना बे।
जीवबद्ध जो साफ करो अब, लोना बे ।।३।।
कहता तुकड्या आडकुजी का, धरले मौना बे ।
मनमे धूनी, मनमें मुद्रा, मनमें सोना बें ।।४।।