बेठे ध्यान में, प्रभू के चित लाये ।
तर्ज : पक्षिणी प्रभाती चारीयासी जाये. . . )
बेठे ध्यान में, प्रभू के चित लाये ।
उठे ना उठाये सहजासन से ! ।। टेक ।।
मेरु -दण्ड सीधा दृष्टि एक तानी।
चक्र भेद झीनी होते आये ।। १ ॥।
स्वॉँस-गति धीमी -धीमी चाल बोले।
अनाहत बोले मीठी बानी ।।२॥।
तारे,चन्द्र,बादल भानु चमकता है।
धीरे धीरे जगता है, साक्षी मेरा ।।३॥।
सर्वव्यापी दृष्टि होनेको आयी है ।
तुकड्याने पायी है, सद्गुरु बानी।।४ |।