बने मस्ताने ऐनोंमे, मजा करते है चैनोंमे
भजन ३२
(तर्ज : जमका अजब तडाका बे... )
बने मस्ताने ऐनोंमे, मजा करते है चैनोंमे
।।टेक।।
गादी तकिया फूलचादरी, पडे बिछौने में ।
कोइ दिन बैठे नदी किनारे, झुकते नैनों में ।।१।।
कोइ दिन शालू जरीदुशाला, खस-फू कानोंमें।
कोइ दिन साथी भूत भुजंगा, डुलते रैनोंमें ।।२।।
कोइ दिन ओढे मृग चर्मासन, कहीं गज-गहिनों में ।
कोइ दिन तुमडी गुदडी कंधे, कहिं रत मैनों में
।।३।।
कोइ दिन राजा, कोइ दिन रंका, कोइ दिन दैन्योमें ।
कहता तुकड्या कोइ दिन भरते, तनके शैनों में
।।४।।