मेरी मौतने मुझको आवाज दिया । अब सोना नहीं, चलना हें भला !

तर्ज : जीवन में पिया तेरा साथ गरे

मेरी मौतने मुझको आवाज दिया ।
अब सोना नहीं, चलना हें भला ! ।। टेक ।।
कहीं ऐसा समझकर तून चले ।
यह धन-दौलत भी पास रहे ।।
नहिं साथ रहेगी कोपिन भी !
सारा ही बदन जल जाये ढला ! ।।१।।
यह सारा ही परिवार तेरा ।
जो सत्ता -मत्ता से हे घिरा ।।
त्यजकर ही अकेला जाना है ।
करनी के फल पाना हो भला? ।।२।।
कही भूलके तू फँस जाये यहाँ ।
तब मार पडेगी अंत-समय ।।
तू खैंचे इधर, जम खैचे उधर ।
वह नहीं छोडेगा, जान खुला ! ।।३॥।
इस कारण यह कहता हूँ तुझे ।
आसक्त न हो किसी झंझट में !!
तुकड्याने सुना, यह बात सही-।
 गुरुदेव-कृपासे ज्ञान मिला ! ॥४॥