पागलपन कीबात न बोलो । अपना जीवन तोलो
पागलपन कीबात न बोलो ।
अपना जीवन तोलो ।। जी ! ।।टेक।।
क्यो दुसरे को दोष दिलाते ?
अवगुण ही सबके बतलाते??
तुम नही अपनी बात दिखाते।
पहिले अपने दिलिको धो लो! ।।१॥।
ये बिंगडा है वो बिगडा है ।
तुम बिगडे,क्या तुम्हें पता है? ?
पता लगा तो साधन कया हे?
अपने प्रभु को खोज निकालो ! ।।२॥।
बडा न बोले अपनी बडाई ।
सुन्ना न बजे भले बजाई ।।
तुकड्यादास कहे, जो गायी-
अपनेआप निभालो ! ।।३।।