प्रजा घबडाके कहती है कि भारत कब सुखी होगा ?

प्रजा घबडाके कहती है कि भारत कब सुखी होगा ? ।
न मालूम क्यों हूआ ऐसा,प्रभू तू कब दुआ देगा?।।टेक।
चली घर घर में घुसखोरी, बढी खुब चोरी औ जारी ।
न किसपर भी भरोसा है, नतीजा जाने क्या होगा।।१।।
सभी अपने में है भूले, न किसको है कदर किसकी ।
कौन होगा गरिबों का, जो सेवा गाँवको देगा ।।२॥।
इधर सरकार पैसों को, करोडो बाँटती जाती ।
न मालूम फिर भी क्यों देना? कहाँपर हो रहा धोखा।।३।।
मुझे लगता हे सबमें ही, ईमानी की जरुरत है ।
कहे तुकड्या सचाई हो, जमाना फेर बदलेगा ॥।४।।