मोल न कुछभी लीया गुरुने

(तर्ज: प्रीत तुझी माझी कुणाला

मोल न कुछ भी लिया, गुरुने मस्त फकीरी दिया। 
भेख बदल नहीं किया, खुशीमें पागल करके लिया।।टेका।।
अब दुनियाकी दौलत मैं हूँ।
सब हिम्मतकी हिम्मत मैं हूँ ।। 
यही दिखाया किया, गुरुने  ।।1।।
आँख लगाकर सूरज  देखा ।
कान मूदकर अनहद सीखा।।
सो$हं से रंग भया,    गुरुनें।।2।।
अमृतधार    किनारा   मेरा ।
साक्षि सदा सबका उजियारा।।
रहत हमेशा   नया,  गुरुने ।।3।।
जन्ममरण का बन्धन काटा।
तुकड्या कहे दिल ऊँचा उलटा ॥
गुरु-चेला एक भया, गुरुने ।।4॥।