मसजिद में भी है खुदा

(तर्ज: ऐ विश्व के चालक प्रभो...)

मसजिद में भी है ख़ुदा, मंदीर में भी राम है।
दोनों नहीं है पत्थरों में, सिर्फ उनका नाम है ।।टेक ।।
एकने गैया पाली, दुसरेने बकरीको लिया । 
एक हजरत बनके आये, एक बन गये श्याम है ।।1।।
एकने है शंख फूंका, दूसरेने  बाँग दी।
दोनोंका मतलब एकही हैं, सेवा और इस्लाम है ।। 2।।
अल्लाहका वही रुप है, ओंकारका जो स्वरुप है।
नाम चाहे हो जुदे, दोनोंका    बिस्तर   एक   है   ।।3।।
तुकड्याने तुकडे जोडे, ना जुदा देखा कोई।
फर्क रखना भूल है, दोनों ठिकाने   एक    है      ।।4॥