प्रगट भये गोकुल में भगवान

(तर्ज: मोहन एकबार फिर आबो...)
प्रगट भये गोकुल में भगवान ।।टेक।।  
हर्ष भया नर - नारिके मन
उमडा प्रेम   तूफान ॥१॥
काल कराल के बंध हटाने ।
धर अवतार महान ।।२।।
काँपत शत्रु सुना जब कानन।
रही न जानमें जान ।।३।।
दीनबन्धु वह सिन्धु-सुधाका ।
मंगलमय महिमान ।।४।।
रुप मनोहर अति सुंदर है ।
नयन मधुर मुस्कान ।।५।।
तुकड्यादास कहे घर-घर मे
ह॒आ कृष्णका  गान ।।६।।