यह कौन खडे है यार, लगाये कतार, नये दमवाले जयहिंद के नारे डाले ।।टेक ।।
यह कौन खडे है यार, लगाये कतार, नये दमवाले
जयहिंद के नारे डाले ।।टेक ।।
जोशिला कदम उठाते है, आजादी की धून गाते है।
ना जरा शरमने पाते है, बेडर हो मौत सजाते है।
ले ध्वजा तिरंगा हाथ, रँगमें जात, बडे मतवाले।
जयहिंद के नारे डालें ।।1॥
हो गये फना घरदार सभी, खाने -पीनेकी मार सभी ।
ना हटे इन्होंका तार कभी, ना होते है बेजार कभी ।
वाहवा रे इन्होंकी शान, गमाई जान, सहनकर भाले।
जयहिंद के नारे डाले ।।2।।
भारत के कोने -कोनेमें , बच्चोंके गाने -गानेमें।
माताके नाज पिसाने में , बीरोंके नैन-निशानोंमे।
यह उमड़ रहा है रंग, क्रांतिका ढंग, टले ना टाले ।
जयहिंद के नारे डाले ।।3।।
अजि कौन इन्हें सिखलाता है,हमको न पता कुछ पाता है।
एक जाता फिर एक आता है, अपना आवाज सुनाता हैं।
कहता है तुकड्यादास,इन्होंको पास, मोहन अपनाले।
जयहिंद के नारे डाले ।।4।।