ये बनकी चिडियाँ क्या बोले

: (तर्ज: ओ नाग कही जा...)
ये बनकी चिडियाँ क्या बोले, मेरी समझ न आता है ।।टेक।।
मै तो ढूँढू प्रभू पियारा, घूम-घूम बन सारा ।
मंदर-मंदर फूल चढाऊँ रंग का न्यारा न्यारा ।। 
फिर भी नहिं दर्श दिखाता है ।। मेरी ।।१।।
किलबिल-किलबिल करती है ये, संघ बनाकर गाये । 
हँसीखुशीसे नाचे दरखत, गूँज-गूँज लहराये ।। 
क्या इनसे प्रभुका नाता है ? ।। मेरी ।।२।।
उड ऊडकर हर द्रख्तपर, अपनी शान दिखाये ।
तुकड्यादास कहे थोडी तो, हमको खबर सुनाये ।।
अब जगमें जी नहिं भाता है ।। मेरी ।।३।।