मायिक वैभव न लगे माय!

मायिक वैभव न लगे माय!।।धृ०।।
नटुनी थटुनी देह जगी या, शेवटि विल्या जाय |।१॥।
शाल-दुशाले पांघरले जरि, शेवटि चिंधि न राह्य ।।२।।
धन-दारादिक सकल पसारा, शेवटि धोखा खाय ।| डे।।
राज्य-सुखाला भोगियले जरि, अंती नंगा जाय ।।४।।
तुकड्यादास म्हणे वर देई, ध्याया गुरुचे पाय ।।५।]