धन्य भीम भगवान ! दलितजन-तारणक आये थे हममें
(तर्ज: हरिका नाम सुमर नर प्यारे...)
धन्य भीम भगवान ! दलितजन-तारणक आये थे हममें।
बडा किया उपकार देशपर, मानव उन्नत करने में ।।टेक।।
तुम्हे मिली प्रेरणा बुध्दसे, बुध्दसंघ बनवानेकी ।
मानवताकी मानव में शुभ मानप्रतिष्ठा लानेकी।।
सोच रहा था प्रभू बहुत दिन, किसको देना काम यहाँ ।
मिले तुमही इस कामयोग्य, फिर दुजा न देखा नाम यहाँ ।।
समय वही बस आया था, जब पुण्य उदय हो जाना था।
क्रांति उचित की धर्म कर्म में, जिसका बडा बहाना था ।।
जाग गया अब बुध्दसंघ यह, गुंज रहा है कणकण में
बडा किया उपकार 0 ।। 1 ।।
सोचा तुमने, कौन नीतिसे दलित सभी उठ जायेंगे ।
तोड सभीकी दमनक्रिया को, आत्मविकास बनायेंगे।।
यहि था माराग मिला तुम्हे जो विश्व-घटक बन जानेका।
रुढिवादको मरोडनेका, धर्मचक्र फैलानेका।।
नहि होगा जो किया तुम्हीने छान-छानकर विद्याको।
संविधानको सही दिशा दी, भ्रान्त जीव तारे लाखो।।
जिसकी करनी ऊँची हो, अवतार उसे गाया जगमें।
बडा किया उपकार0।।2।।
इन जातिनमें संत हुए पर, दबे रहे जन-रूढीसे।
मानवताका हक ना पाये, दुःखी थे अपने जी से।॥।
अब आया है साम्ययोग यह बता दिया तुमने सबको।
चाहता है भगवान बुध्द यह गुंजा दिया सारे नभको।।
प्रबुध्द करने जनता सारी बुध्द जो तुमने चीन्हा है।
धन्य किया है जीवन सबका, सुविचारीने माना है॥
तुकड्यादास कहे निंदकको, कभी नही शांति किसमें।
बडा किया उपकार 0।।3।।