पूरी करो कामना बापु की।
(तर्ज : मजसवे बोल रे माधवा.... )
पूरी करो कामना बापु की।
तबही किरत बढ़े आपकी ॥टिक॥
वे चाहते थे, मदिरा छोडो।
घूस-मिलावट का पथ तोडो ।।
क्यों संगत करते हो साँप की ? ॥1।।
आजादी पायी है हमने ।
सद्गुण सत् चारित्र्य बनाने।।
सीढी चढो, न लो राह पाप की ॥ 2॥
पीड परायी अपनी मानो।
उन गरिबों के दुख पहिचानो।।
दुर करो बिपद ही ताप की ।।3॥
यह न करो तब दुख पाओगे।
कहे तुकड्या फिर पछताओगे।।
यह दौलत किसी के न बाप की।।4।।