मानव मानव का मित्र बने, तुम क्यों चाहते वह भंगी रहे?

(तर्ज : मेरे दिलमें गुरुने जादु....)

मानव मानव का मित्र बने, तुम क्यों चाहते वह भंगी रहे? 
यह मानवता का दोष बड़ा, अजि! क्योंकर कोइ गुलामी सहे?।।टेक।।
आजाद हुए हम किस कारण ?जब प्रगत नहीं मानव होगा।
सहकार सभी को करना है, जीवन के सभी उद्योग रहें  ।।1।।
माताने उठाया था मैला, तो क्या अपवित्र उसे समझे?
प्रभु के कदमोंसे निकले ये, जिन कदमोंसे गंगाजी बहें ।।2 ॥
यह गांधी महात्मा बोल गये, अपनी आत्माकों खोल गये।
सुननाहि हमारा फर्ज नही, अब करने को जी क्यों न चहे ? ।।3 ॥
सारे समाज के सेवक हैं, फिर भंगी रहे या हो ब्राह्मण ।
घरबारी रहे या हो साधू, सबका हि मरातब एक कहे।।4 ॥
यह जबतक होगा नहि हमसे, भारत न बढ़ेगा आगे कभी ।
तुकड्या का भी सिध्दान्त यही, नर बीर रहें सत्संगी रहे ।।5 ॥