मेरे श्याम ऐ सलोने ! नाच मेरे अंगना
(तर्ज: मोरे नैनोंमे रामरूप छाय गयी रे...)
मेरे श्याम ऐ सलोने ! नाच मेरे अंगना ।।टेक ।।
काली काली बढछिया का माखन खिलाऊँ ।
प्रेमभरे नैनोंके जलसे नहलाऊँ। दिलके सिंहासनपे, करू पूजना।।1।।
श्वासों की झनकार बाजा बजाऊँ |
वृत्ती के तारों की तारी चढाऊँ। गाने से परदे को करूँ भंगना ।।2 ॥
मुझमें ही तू है, तुझमें ही में हूँ।
यही ध्यान करके मैं तुकड्या अभय हूँ। जनम जनम छोड़ूं फिर संग ना ।।3।।